वन भूमि को भू अभिलेखों में दर्ज कराने हेतु डीएम ने की बैठक DM meeting to record forest land in land records



गाजियाबाद, ( प्रमुख संवाददाता )  जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी द्वारा उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की लखनऊ खण्डपीठ द्वारा तीन रिट याचिकाओं में दो आदेशों के अनुपालन में उ0प्र0 के सभी जनपदों में वन भूमि को भू-अभिलेखों में दर्ज कराये जाने हेतु अपने कार्यालय कक्ष में बैठक आहूत की गयी। उन्होने जनपद स्तरीय समिति का गठन शासनादेश सं0-2287/14-2-2018-306 जी/2017, दिनांक 18 जुलाई 2018 द्वारा गठित समिति के कार्यो की समीक्षा की। उन्होने बताया कि शासन से समस्त जनपदों के लिये आदेश है कि वन भूमि को अमलदारामद चकबन्दी प्रक्रिया में 45.94 भूमि आती है। उस भूमि को अमलदारामद की जानी है। जिसमें अधिकतर भूमि मोदीनगर की है।

जिला वन अधिकारी ने जिलाधिकारी को जानकारी दी कि अतरौली खर्द मे वन विभाग की भूमि पर ग्रामीणो ने पक्के निर्माण कराये हुये है। फोर्स की कमी के कारण वह भूमि कब्जा नही हो पा रही हैं। इस पर जिलाधिकारी ने आदेश दिये कि संयुक्त सर्वेक्षण कराया जाये। उन्होने समस्त उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि एक सप्ताह के भीतर जमीदारी विनास एवं भूमि सुधार अधिनियम-1952 की धारा-117 के अधीन विज्ञप्ति सं0-617/14, दिनांक 11 अक्टूबर 1952 के अनुसार वन भूमि को भू-अभिलेखों में दर्ज कराया जाये तथा शासनादेशानुसार अग्रिम कार्यवाही करायी जाये। 

उन्होने सम्बन्धित को निर्देश दिये कि सभी प्रकरण मेरें समुख प्रस्तुत किये जाये। जिलाधिकारी ने एन0एच.0 58 मेरठ रोड के चैडीकरण में जो पंेड अवरोधक बन रहे है उन पेडों के कटान में विलम्ब होने पर कडी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि यह कार्य जनता की भलाई का कार्य है इसमें विलम्ब न करे जल्द ही अपने उच्च अधिकारियों से अनुमति लेकर सडक में आ रही बाधा हो दूर करें। जिससे यातायात के आवागमन में सुगमता हो । 
      
बैठक में अपर जिलाधिकारी वि/रा0, समस्त उपजिलाधिकारी, एव जिला वन अधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।




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