1984 सिख दंगा केस में सजा का ऐलान, एक को फांसी दूसरे को उम्रकैद 1984 Sikh riots case: Sentenced to death, one hanged to life imprisonment



नयी दिल्ली ।  दिल्ली में सिख विरोधी दंगा मामले में मंगलवार को यशपाल सिंह को सजा-ए-मौत तथा नरेश सहरावत को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। मामले का पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है- 

एक नवम्बर, 1984: सिखों के खिलाफ 1984 के दंगों में दक्षिण दिल्ली के महिपालपुर में हिंसक भीड़ ने हरदेव सिंह और अवतार सिंह की हत्या कर दी। 

23 फरवरी 1985: जयपाल सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। 

मई 1985, जस्टिस रंगनाथ मिश्रा आयोग का गठन 

नौ सितंबर 1985: हरदेव सिंह के भाई संतोख सिंह ने न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा आयोग के समक्ष हलफनामा दाखिल दिया और दिल्ली पुलिस की दंगा रोधी प्रकोष्ठ ने जांच शुरू की। 

20 दिसंबर 1986: जसपाल सिंह को बरी कर दिया गया।

1993: सिंह के हलफनामे पर न्यायमूर्ति जे डी जैन और न्यायमूर्ति डी के अग्रवाल की समिति की सिफारिश पर वसंत कुंज पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया।

नौ फरवरी, 1994: दिल्ली पुलिस किसी भी आरोपी के खिलाफ अभियोग चलाने के लिए सुबूत एकत्र नहीं कर सकी और जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। 

12 फरवरी,2015: गृह मंत्रालय ने 1984 दंगों की पुन: जांच के लिए एसआईटी का गठन किया।

31 जनवरी 2017: एसआईटी ने नरेश सहरावत और यशपाल सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया और 18 गवाहों का जिक्र किया।

14 नवम्बर 2018: अदालत ने सिंह और सहरावत को दो लोगों की हत्या का दोषी ठहराया। 

20 नवम्बर 2018: दिल्ली की अदालत ने यशपाल को मृत्युदंड और शेहरावत को उम्रकैद की सजा सुनाई।



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