उच्च शिक्षण संस्थानों पर त्रिपक्षीय समझौता थोपे जाने के खिलाफ आयोजित रैली में केवाईएस ने लिया भाग KYS took part in rally organized against imposing trilateral settlement on higher educational institutions



  • निजीकरण को बढ़ावा देने वाली इस त्रिपक्षीय समझौते को तुरंत वापस लेने की मांग की
  • सभी दोहरी शिक्षा प्रणाली वाले विश्वविद्यालयों में सभी छात्रों को एक समान सुविधाएँ देने की माँग उठायी


नई दिल्ली, ( विशेष संवाददाता )  क्रांतिकारी युवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में सार्वजनिक उच्च शिक्षण संस्थानों पर त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) थोपे जाने के खिलाफ दिल्ली विश्वविद्यालय अध्यापक संघ द्वारा (डूटा) द्वारा आयोजित रैली में भाग लिया।

ज्ञात हो कि यह रैली केंद्र भाजपा सरकार द्वारा एमओयू के माध्यम से सार्वजनिक वित्तपोषित संस्थानों को खत्म करने के खिलाफ की गयी थी। इस त्रिपक्षीय समझौते के तहत हर केंद्रीय विश्वविद्यालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा यूजीसी के बीच हस्ताक्षर किया जाना अनिवार्य है। यह एक ऐसी नीति है जिसके तहत सरकारी विश्वविद्यालयों के वित्तीय ढाँचे को बदलने तथा सरकारी संस्थानों की देखरेख तथा फैलाव का बोझ छात्रों पर डाला जाएगा। ऐसा करने से शिक्षकों की नियुक्ति, पद्दोनती तथा शोध-कार्यो पर भी बुरा असर पड़ेगा।

इस समझौते के तहत केंद्र सरकार यूजीसी को नजरंदाज कर संस्थानों के वित्तीय मसलों पर फैसले लेने का अधिकार मिल जायेगा। सबसे बड़ी बात है कि इस समझौते के तहत छात्रों की फीस में उपभोगता शुल्क के बहाने भारी बढ़ोत्तरी होगी और संस्थानों को शोध कार्यों के लिए प्राइवेट कंपनियों से आरती मदद लेने को मजबूर होना पड़ेगा। साथ ही, शैक्षणिक ढाँचे को बढाने के लिए संस्थानों को हेफा से कर्ज लेना पड़ेगा, जिसके तहत भारी फीस बढ़ोत्तरी होगी। समझौते के तहत यह भी प्रावधान है कि संस्थानों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाए, जिसमे आंतरिक वित्तीय लक्ष्य तय किये जायेंगे। इन लक्ष्यों को पूरा करने में सामाजिक सरोकारों को भी दरकिनार किया जाएगा जिस कारण पिछड़े एवं वंचित समुदायों से आने वाले उच्च शिक्षा में नहीं आ पायेंगे।

आज जब आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्गों से आने वाले छात्र और भी ज्यादा संख्या में सार्वजनिक विश्वविद्यालय खोले जाने की माँग उठा रहे हैं ताकि उन्हें बेहतर पढ़ाई के साथ के अच्छी नौकरी मिल सके तब सार्वजनिक संस्थानों का निजीकरण किया जाना और उनको वित्तीय सहायता में कमी करना वंचित वर्ग के छात्रों के साथ अन्याय है। इस नीति के तहत वंचित और हाशिये पर रह रहे समूहों पर रह रहे छात्रों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की केवाईएस भर्त्सना करता है और माँग करता है कि इस त्रिपक्षीय समझौते को रद्द किया जाए।  साथ ही, सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में इन वंचित छात्रों को लाने के लिए उन्हें एडमिशन में रियायती अंक (डेप्रीवेशन पॉइंट्स) दिए जायें।





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