गुजरात: प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी, रूपाणी ने राहुल पर बोला हमला Gujarat: Issues of migrant laborers continue, Rupani talked about Rahul's attack



अहमदाबाद। गुजरात से हिंदी भाषी प्रवासियों का पलायन मंगलवार को भी जारी रहा। वहीं सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त रहे।इस बीच, पुलिस ने औद्योगिक इलाकों के आसपास गश्त बढ़ा दी है जहां प्रवासी मजदूर रहते हैं।राज्य के साबरकांठा जिले में 28 सितंबर को 14 महीने की बच्ची के साथ बलात्कार हुआ था और इस आरोप में बिहार निवासी मजदूर को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से ही, छह जिलों में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं हुईं। इनमें से ज्यादातर जिले उत्तर गुजरात के हैं। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने टि्वटर पर लगातार कई ट्वीट कर पूछा कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी पार्टी के उन सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जो "गुजरात में प्रवासियों के खिलाफ हिंसा भड़का रहे हैं।"

भाजपा, कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर पर और उनके संगठन गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना पर हिंदीभाषी लोगों के खिलाफ हिंसा भड़काने का आरोप लगा रही है। रूपाणी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘कांग्रेस ने पहले प्रवासियों के खिलाफ हिंसा भड़काई। कांग्रेस अध्यक्ष ने इस हिंसा की निंदा करने के लिए ट्वीट किया। क्या कांग्रेस अध्यक्ष को शर्म नहीं आती?’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर कांग्रेस अध्यक्ष गुजरात में हिंसा के खिलाफ हैं तो उन्हें अपने स्वयं के सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है जिन्होंने गुजरात में प्रवासियों के खिलाफ हिंसा भड़काई है। ट्वीट करना कोई समाधान नहीं है, कार्रवाई करने से हल निकलेगा। लेकिन क्या वह कार्रवाई करेंगे?’’

रूपाणी ने कहा कि उनकी सरकार सभी नागरिकों में यह विश्वास दिलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है कि वे गुजरात में सुरक्षित हैं।मुख्यमंत्री ने माइक्रो ब्लोगिंग साइट पर कहा, ‘‘कांग्रेस अध्यक्ष को इसपर ट्वीट करने पर शर्म आनी चाहिए क्योंकि उनकी खुद की पार्टी प्रवासियों के खिलाफ हिंसा भड़का रही है।’’ गांधी ने सोमवार को कहा था कि गुजरात में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाना बिल्कुल गलत है और वह इसके खिलाफ हैं।कांग्रेस प्रमुख ने ट्विटर पर कहा था गुजरात में हिंसा की जड़ कारख़ाने का बंद होना और बेरोज़गारी है, जिससे व्यवस्था और अर्थव्यवस्था दोनों चरमरा रही हैं।अल्पेश ठाकोर ने भी मंगलवार को अपने संगठन के खिलाफ भाजपा के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि प्रवासियों को निशाना बनाना पूरी तरह से गलत है और वह इसके खिलाफ हैं।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘ ज्यादातर हमलावर ठाकोर समुदाय से हैं... लेकिन यह आरोप उस लोकप्रियता को समाप्त करने की कोशिश है जो मैंने अपने संगठन के साथ 16 राज्यों में हासिल की है। मुझे अपमानित किया जा रहा है। मेरे या मेरे लोगों के खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। सच की जीत होगी।’’।इस बीच एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें अल्पेश ठकोर कथित रूप से प्रवासी मजदूरों के खिलाफ भाषण देते हुए दिख रहे हैं। इसे ही राज्य में हिंदी भाषी लोगों के खिलाफ हिंसा के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है।ठाकोर उत्तर गुजरात के मेहसाणा जिले के भौचरजी नगर में एक सभा को संबोधित करते हुए कथित रूप से कह रहे हैं, ‘‘ ये लोग जो बाहर से आए हैं वे अपराध करते हैं। वे आम ग्रामीणों को पीटते हैं और अपने राज्य वापस चले जाते हैं। ऐसे लोगों के पास यहां मारूति और अन्य कंपनियों में नौकरियां हैं लेकिन हमारे लोगों के पास यहां नौकरी नहीं है।’’

संभवत: मोबाइल फोन से शूट किए गए इस वीडियो में वह कहते हैं ‘‘ अगर आप उन्हें भारतीय समझते हैं और उन्हें 20 फीसदी नौकरियों देते हैं...लेकिन गुजरातियों को ऐसे कारखानों से निकाला जा रहा है, गुजराती भूख से मर रहे हैं।’’ इस बीच, हिंदी भाषी लोग ट्रेनों और बसों के जरिए राज्य से जा रहे हैं। ये गाड़ियां खचाखच भरी हुई हैं। इस तरह की खबरें हैं कि लोगों की बढ़ी संख्या के मद्देनजर बसों के किराये में इजाफा कर दिया गया है।कुछ लोगों ने कहा कि वे डर गए हैं और आरोप लगाया कि उन्हें चले जाने या परिणाम भुगतने की धमकी दी गई है।अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पर एक प्रवासी मजदूर ने पत्रकारों को बताया ‘‘कुछ लोग कल रात हमारे इलाके में आए थे और मुझसे तुरंत इलाका छोड़कर वापस अपने गृह राज्य में जाने के लिए कहा। ऐसा नहीं करने पर पीटने की धमकी दी।’’

गुजरात में उत्तर भारतीयों के संगठन उत्तर भारतीय विकास परिषद के अध्यक्ष श्याम सिंह ठाकुर ने कहा कि हालात सामान्य हो रहे हैं लेकिन लोग पहले ही जाने का फैसला कर चुके हैं और वे बसों और ट्रेनों में बैठकर राज्य से जा रहे हैं।उन्होंने दावा किया कि अबतक 60,000 से ज्यादा हिंदी भाषी प्रवासी मजदूर राज्य से जा चुके हैं। श्याम सिंह ठाकुर ने कहा कि धमकी और डर का माहौल खत्म हो गया है और शांति लौट रही है। लोगों को अब धमकाया नहीं जा रहा है और उन्होंने कारखानों में काम शुरू कर दिया है।इस बीच, पुलिस लोगों में विश्वास बहाली के लिए प्रभावित औद्योगिक इलाकों में गश्त कर रही है।वडोदरा में सैकड़ों पुलिस कर्मियों ने औद्योगिक इलाकों में फ्लैग मार्च किया जहां कई बड़े और छोटे कारखाने हैं जिनमें 25000 प्रवासी मजदूर काम करते हैं। वडोदरा के पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलौत ने कहा, ‘‘ हिंदी भाषी प्रवासियों की सुरक्षा के लिए औद्योगिक इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इन इलाकों से किसी भी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई है।’



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